रावण माँ बगलामुखी का उपासक था, यह मान्यता है। फिर हनुमान श्रीराम को उसी देवी के पास क्यों ले गए? इस फ़िल्म में सुनिए माँ पीताम्बरा बगलामुखी की कथा: हरिद्रा सरोवर से उनका प्राकट्य, मदन असुर की वाक्-सिद्धि और स्तंभन शक्ति, और वह मान्यता जिसके अनुसार श्रीराम ने हवन करके माँ से ब्रह्मास्त्र पाया। साथ ही उन प्रश्नों के उत्तर जो हर भक्त के मन में आते हैं: माँ का सब कुछ पीला क्यों है, 'बगलामुखी' नाम का अर्थ क्या है, हवन में लाल मिर्च क्यों चढ़ती है, माँ की साधना कैसे होती है, और क्या यह साधना किसी का बुरा करने के लिए है। स्रोत: प्राकट्य और मदन असुर की कथा तंत्र-परंपरा से (डेविड किन्सले, Tantric Visions of the Divine Feminine);
स्तंभन का वर्णन रुद्रयामल के बगलामुखी स्तोत्र से; श्रीराम, हनुमान, रावण और पांडवों से जुड़े प्रसंग बनखंडी (काँगड़ा, हिमाचल प्रदेश) की मंदिर-मान्यता से, वाल्मीकि रामायण से नहीं; वाल्मीकि रामायण (युद्धकांड, सर्ग 108) में यह बाण अगस्त्य मुनि का दिया बताया गया है।
जहाँ शास्त्र-प्रमाण नहीं मिला, वहाँ फ़िल्म में 'मान्यता है' कहा गया है। युद्ध के दृश्य नाटकीय रूपांतरण हैं। यह फ़िल्म श्रद्धा और जानकारी के लिए है; कोई भी तांत्रिक साधना योग्य गुरु के मार्गदर्शन के बिना न करें। अगली फ़िल्म: देवी मनसा। जय माँ पीताम्बरा।