क्या हम लोगों को उनकी शक्ल, रंग, जाति, धर्म, अमीरी-गरीबी या किसी और पहचान के आधार पर अलग-अलग देखते हैं?
आँखें हमें दुनिया देखने की क्षमता देती हैं, लेकिन किसी इंसान की असली पहचान उसके रूप या स्थिति से नहीं होती। हमें हर व्यक्ति को सम्मान और इंसानियत की नजर से देखना चाहिए।